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Friday, June 15, 2018

Amsterdam

                                                                 नहरों का जाल या नेदरलैंड



 दुनिया के हर हिस्से में खूबसूरत शहर मिलते हे। सभी अपने आप में विशिष्ट। ऐतिहासिक दृष्टि से ,प्राकृतिक,मौसम,व्यापार कोई भी कारन हो सकता हे विशिष्टता का। एम्स्टर्डम शहर जो कि नेदरलैण्ड की राजधानी हे वहां जाने का अवसर मिला। जब एम्स्टर्डम शहर में भ्रमण किया तो समझ में आया की यह शहर तो सभी कारणोंसे महत्वपूर्ण हे। यूरोप का अन्य देशों के साथ व्यापार में इस शहर की मुख्य पहचान बनी हुई है। आज भी यहाँ का हवाई अड्डा बहुत ही व्यस्त एवम बड़ा हे। इस शहर का नाम यहाँ की एम्स्टर नदी पर बने डैम के किनारे बसे होने के कारण पड़ा। पूरा शहर नहरों के जाल के किनारों पर बसा हुआ हे। यहाँ पर १५० से भी अधिक नहरे हे जो की अनगिनत पुल के नीचे से निकलती हे।


                     
                                                                           टूरिस्ट बोट 


 इस शहर का भ्रमण भी हमने नाव में बैठ कर ही किया था।इन नहरों के दोनों ओर सुन्दर घ" हम ब्रुसेल्स के पास छोटे से टाउन से कार द्वारा दो घंटे में एम्स्टर्डम पहुँच गए थे। हमारा होटल एयरपोर्ट के पास में था। शहर देखने के लिए हमने एयरपोर्ट से मेट्रो ट्रैन में बैठ कर गए. हिन्दीफ़िल्मों के बहुत; दृश्य यहाँ पर फिल्माए गए थे।और आज भी यहाँ पर बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग होती है।




                                                     

  टुलिप के रंग बिरंगे फूल 

                                              अप्रेल के महीने में यहाँ पर सैलानियों की भरमार रहती हे।

यूरोप में बाइसिकल बहुत ही लोकप्रिय हे। छोटी दूरी के लिए लोग इसका प्रयोग बहुत करते हे। 
पूरे परिवार को एक साथ बाइसिकल पर घूमते हुए देखना एकदम सामान्य सी बात हे। 
इसको और आसान बनाने के लिए बाइसिकल के लिए विशेष लेन फुटपाथ  में लाल रंग की बनी होती हे जिस पर पैदल चलना वर्जित हे। 

        
एम्स्टर्डम में बाइसिकल उपलब्ध हे 



अधिकांश शहरों में किराये पर बाइसिकल उपलब्ध रहती हे। यह स्वास्थ्य की दृष्टी से भी एवं भीड़ भाड़ की जगहों
में सुविधा के तौर पर काम में ली जाती हे। 







Friday, February 9, 2018

romanchak rome

                                                     
                                                            रोमांच से भरपूर रोम


विद्यार्थी जीवन में जब स्कूल मेंभूगोल की कक्षा में  विश्व का ग्लोब देखते थे तो अचम्भा होता था की कैसे नक़्शे बनाने वाले सम्पूर्ण विश्व को एक स्फीयर में चित्रित कर देते है। फिर इतिहास में पढ़ते थे विभिन्न सभ्यताओं के बारे में जो की हजारों साल पहले विद्यमान थी। एशिया में हरप्पा एवं मोहनजोदड़ो की सभ्यता एवं  यूरोप में यूनानी सभ्यता। विभिन्न साम्राज्यों में रोमन साम्राज्य एवं इसकी विशालता के बारे में बहुत पढ़ाथा।  किसी भी विशालता का अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल होता हे जब तक हम उसे देख नहीं लेते।
सौभाग्य से इस वर्ष अक्टूबर में रोम शहर जो की इटली में हे घूमने का अवसर मिला।हमने ब्रुसेल्स एयरपोर्ट से जो की बेल्जियम में हे रोम की फ्लाइट ली और डेढ़ घंटे में रोम
रोमन साम्राज्य की भव्यता  का अनुमान भी रोम देखने के बाद ही हुआ। आज से हजारों वर्ष पहले जो इम्मारते बनाई गयी उनकी स्थापत्य कला देख कर बहुत ही अचम्भा होता हे। is
इस शहर की स्थापना.  ईसा पूर्व ८०० वर्ष पुरानी बताई जाती हे। कहा जाता हे की पाश्चात्य सभ्यता का जनम यहीं
पर हुआ था।
वैसे तो रोम में अनगिनत दर्शनीय जगह हे। इन सभी को देखना तीन दिन में संभव नहीं था। फिर भी जिन जगह को देखा
देखते ही रह गयी।

फोरम जो कि किसी वक्त बहुत सारी गतिविधयों का केंद्र था आज कुछ मूर्तियों एवं उस समय के इमारतों के खंडहर के रूप में आज मौजूद हे।





यह बाज़ार ,सांस्कृतिक एवं राजनितिक गतिवधियों का स्थान था।हर

                                                        रोम शहर  का फोरम     

       
                                      

यह पर ही जुलुस निकलना,खेल कूद प्रतियोगिता एवं न्यायिक प्रक्रिया होती थी। यह विश्व भर में सबसे अधिक
गतिविधि वाला केंद्र था।
रोम शहर कला एवं स्थापत्य का भण्डार सा हे. .छार सड़क या गली बहुत ही बड़े चौक में मिलती हे और वहां बड़े ऊंचे खम्भे नजर आते हे जिनके ऊपर नक्काशी  द्वारा विभिन्न भाषाओँ में कुछ लिखा हुआ होगा या फिर आकृतियों द्वारा विचार प्रकट किये हुए हे।


                                             
     फोरम में खड़ा स्तम्भ  (नक्काशी वाला खम्भा )
                                                       




                                                                










                                                        स्तम्भ पर की हुयी नक्काशी

 इन स्तम्भ की ऊंचाई को देख कर समझ में ही नै आता की कलाकार ने कैसे इतनी ऊंचाई पर अपनी कला बिखेरी होगी ?
वैटिकन म्यूजियम जो की वैटिकन सिटी के अंदर हे विश्व के उल्लेखनीय म्यूजियम में से एक हे और यहाँ आने वाले     पर्यटकों की संख्या भी अनगिनत हे।
यहाँ पर ७०,००० से भी अधिक कलाकृतियों का संग्रह हे जिसमे से २०,००० के करीब पर्यटकों के लिए रखी  गयी हे।
इनमे पोप द्वारा एकत्रित किये गए भित्ति चित्र एवं उच्च कोटि की स्थापत्य कला की मूर्तियां हे। माईकल ऐंजेलो जो की   चित्रकला एवं स्थापत्यकला दोनों में निपुण था के द्वारा बनाये गए कलाकृति का संग्रह हे.
ट्रेवी फाउंटेन जो की १८वी शताब्दी में  रोम के ट्रेवी तहसील में बनवाया गया था.पत्थऱ से तराशा गए यह फवारा देखते हे तो लगता हे की से निहारते ही रहे। रात्रि के समय तो इसमें और भी निखार आ जाता हे। यहाँ पर बहुत हॉलीवूड की फिल्मो की शूटिंग भी हो चुकी हे. मान्यता हे की यदि इसमें एक सिक्का फेका जाने पर यहाँ दुबारा आने का संयोग बनता हे. इस वजह से हर पर्यटक यहाँ सिक्का फेकते रहते हे और प्रशासन इन सिक्को को यहाँ से निकालते  हे।
           


                                                   
          

पूरे विश्व में प्रसिद्ध पिज़्ज़ा एवम पास्ता इटली की ही देन है। और इसी कारण रोम के हर गली कूचे में पिज़्ज़ा एवम पास्ता की रेस्त्रां   मिल जायेंगे। यहां पर शाकाहारी  पर्यटकों को अधिक  दिक्कत नहीं होती हे।
हर सड़क कुछ दूरी के बाद एक विशाल चौक में मिल जाती हे। इस तरह पूरे शहर में अनगिनत चौक हे
चौक के बीच में  या तो विशाल स्तम्भ या सूंदर कलाकृतियों से सुसज्जित फव्वारा है जो की जगह की खूबसूरती को निखारता है।
अनगिनत म्यूजियम भी हे यहाँ पर लेकिंन सभी को देखना कम समय में सम्भव नहीं हे।
यहाँ पर एक स्थान है जिसे स्पेनिश स्टेप्स कहते है। हर समय पर्याटकों की भीड़ लगी रहती है। बहुत ही सुन्दर
संरचना है।



Wednesday, September 20, 2017

Chaumonix alps parvat ke beech me

इंसान का मस्तिष्क जिज्ञासा से परिपूर्ण होता हे। इसी की पूर्ती के लिए जहाँ तक होता हे वह अपनी हैसियत के अनुसार दर्शनाय स्थानों का भ्रमण करता हे। मुझे भी इस बार शामोनी जाने का अवसर मिला जो कीआल्प्स पर्वत श्रेणी से घिरा हुआ हे। प्राथमिक कक्षाओं में भूगोल में पढ़ा था की आल्प्स पर्वत श्रेणी यूरोप में हे जहाँ के आसपास का इलाका बहुत ही सूंदर हे विशेषकर गर्मी के मौसम में इसके सौंदर्य में निखार आ जाता हे। जब यहाँ जाने का अवसर मिला तो ज़ाहिर हेकि मन में उत्सुकता जगी। हमने ब्रूसेल एयरपोर्ट से जिनेवा की फ्लाइट ली। जिनेवा स्विट्ज़रलैंड में हे ब्रूसेल बेल्जियम में हे। और शामोनी फ्रान्स में हे.    वैसे  जगह तीन देशों यानि की फ्रांस,इटली एवं स्विट्ज़रलैंड के जंक्शन पर स्थित हे।
जिनेवा एयरपोर्ट से कार से हम सवा घंटे का सफर कर के शामोनी पहुंचे यह एक घंटे का सफर बहुत ही सूंदर वादियों का था. सड़क के एक और ाबरफ से ढके हुए आल्प्स के पहाड़ एवं दूसरी और सूंदर रहवासी इलाका.
अप्रेल का महीना था। गर्मी के मौसम की शुरुआत थी। अतः बर्फ और हरियाली दोनों विद्यमान थे. छोटे छोटे टाउनशिप
एकदम प्रकृति के करीब करीने से सजे हुए. .यह तय कर पाना मुश्किल था कि इन दृश्यों को केमेरे में कैद करूँ या मस्तिष्क की हार्ड डिस्क में। इस सफर को तय करके जब हम शमोनी पहुंचे तो अपने आप को चरों और से आल्प्स
श्रेणी से घिरा पाया ३६० डिग्री से घूम कर देखा तो भी आल्प्स ही नज़र आये.
हमने एक अपार्टमेंट बुक कर लिया था। इसमें सभी सुविधा थी. अपार्टमेंट की बालकनी से
                                                                               


                                                           अपार्टमेंट की बालकनी से दृश्य

से जो दृश्य नज़र आया वह इस चित्र में हे। पर्वत पर चरों तरफ केबल कार का आवागमन एवं बेलून उड़ाते हुए।
सम्पूर्ण इलाका सैलानियों से आबाद। लगा की शायद गर्मी के मौसम में सैलानी अधिक हे।
लेकिन यह जान कर आश्चर्य हुआ की यहां पर ठण्ड के मौसम में भी टूरिस्ट आते रहते हे। सर्दी में बर्फ पर स्कीइंग करने वालों की तादाद अधिक होती हे। यहाँ के निवासियों की आजीविका सैलानियों के सहारे चलाती हे.
रेस्टॉरेंट्स ,दुकाने ,और बर्फ में होने वाले स्पोर्ट्स के उपकरणों की बिक्री एवं मरम्मत आदि से।
पर्वतारोहण,और स्कीइंग करने वाले मुख्यतया इस स्थान को पसंद करते हे.
अनगिनत होटल्स एवं अपार्टमेंट्स बने हुए हे यात्रियों के ठहरने के लिए। यहाँ पर जी ग्लेशियर हे उसे मोंट दे ब्लैंक के नाम से जाना जाता हे.यह यूरोप की सबसे ऊंची पहाड़ी पर हे करीब ४५००फ़ीट से अधिक.शामोनी से ग्लेशियर तक पहुँचाने के लिए एक ट्रैन से जाना पड़ता हे। शमोनी विलेज से करीब दो किलोमीटर की ऊंचाई पर हे यह। एक लाल रंग की बहुत ही सूंदर ट्रैन के द्वारा हमने यह सफर तय किया। दो किलोमीटर की यात्रा २५ मिनट में तय हुयी। वहां पहुँचाने पर  हम दुनिया से सातवे आसमान पर हे। ट्रैन स्टेशन से ग्लेशियर तक पहुँचने के लिए केबलकार के द्वारा   जाना पड़ता हे।


बादल बर्फ से अठखेलियां करते हुऐ 


Thursday, August 4, 2016

Brussels in Belgium

यूरोप महाद्वीप रमणीक एवं सुंदरता का अद्भुत खजाना है। गर्मी के मौसम में तो इसकी सुंदरता में और भी निखार आ जाता हे। छोटे छोटे देशों का समूह जिनकी संस्कृति  और जलवायु एक जैसी हे। स्थापत्य कला बेजोड़ एवं इतिहास से परिपूर्ण।
 इसी यूरोप महाद्वीप में एक छोटा सा देश हे बेल्जियम। .   यह यूरोप के उत्तर पश्चिम में हे।   इसकी राजधानी हे ब्रसल्स
यह शहर पर्यट्कों के लिए बहुत ही आकर्षण का केंद्र हे. इसके  बहुत कारन हे  .यह शहर इतिहास संस्कृति एवं कला का केंद्र हे। यहाँ पर पचास से भी अधिक म्युसियम हे.यह शहर सम्पूर्ण यूरोप का प्रतिनिध्त्वि करता हे। यहीं पर ही सभी यूरोपीय देशों के कार्यालय हे. इस वजह से भी इसका विशेष महत्त्व हे.
पुराने   शहर के बीच में बसा हुआ हे ग्रैण्ड प्लेस। यह चौक या स्क्वायर अपनी अनोखी स्थापत्य कला के लिए मशहूर हे।
यहाँ की इमारते एवं बीच बीच में विशाल खम्भे देखने वाले के दांतों तळे उंगली दबाने को मजबूर कर देते हे। इन इमारतों पर की गयी सोने की नक्काशी इसकी सुंदरता में चार चाँद लगा देती हे. 
ग्रैंड प्लेस 
यहाँ पर एक बाज़ार बहुत ही सूंदर हे जो कि पूरा ढ़का हुआ हे ताकि मौसम की मार का खरीदने वालों पर असर नहीं पड़े. . दोनों और एक जैसी दिखने वाली दुकानों की कतार हे  और बीच में साफ सुथरी जगह चलने के लिए।




                                                       एयर कंडिशन्ड बाजार (मीना बाजार )

                                                                               
                                                          एयर कंडिशन्ड बाज़ार

मेने  तो इसका नाम  मीना बाजार  ही रख दिया  हे।
ऑटोमियम यहाँ की प्रसिद्द ईमारत हे.यह १०२ मीटर ऊंची हे। इसका निर्माण १९५८ में हुआ था।यह ईमारत अपने आप में अनोखी है। स्फीयर हे जो tubes  द्वारा जुड़े हुए हे। इन तुबेस में एस्केलेटर्स हे जिसके द्वारा एक स्फीयर से दूसरे में पहुंचा जा सकता हे। इन स्फियर्स में दर्शनीय वस्तुए ऱखी हुयी हे.

                                                                     
                                                       
                                                              सड़क पर आकर्षक घड़ी 



ब्रुसेल्स में एक म्यूजियम हे जो सिर्फ संगीत के इंस्ट्रूमेंट्स का हे। बहुत ही ऐतिहासिक वाद्य यंत्रों से लेकर आधुनिक यंत्रों तक का संग्रहालय  हे।यह बहुत ही दुर्लभ संग्रहालय हे। इसी तरह का एक संग्रहालय मेने अमेरिका के एरिज़ोना प्रान्त के फीनिक्स शहर में देखा हे।

ब्रुसेल्स में बहुत बड़े बड़े उद्यान हे। और यहाँ की नगरपालिका इन उद्यानों की मेंटेनेंस बहुत ही बढ़िया रखती हे। जब हम एक उद्यान में गए तो यह जान कर आश्चर्य हुआ कि उसके नीचे एक लम्बी सुरंग बनी हुई  हे जो की कारों के यातायात के लिए हे।



                                  

Wednesday, July 20, 2016

Durbuy (iSCON. Temple in Belgium)




हम हिन्दुस्तानी कहीं भी विदेश में जाते हे हमारे देश को और हमारी संस्कृति को नहीं भूल पते हे। कुछ भी देश जैसा दिखता हे तो बच्चे की तरह उत्साह से सबको दिखाने की कोशिश करते हे।  यदिअकेले घूम रहे हे तो उस दृश्य को कैमरे में लेने की कोशिश करते हे। ऐसा ही मेरे साथ हुआ जब में यूरोप में घूम रही थी। जी हाँ बेल्जियम के पास दरबाय में.यह टाउन बेल्जियम देश के लक्सेम्बुर्ग प्रान्त में हे
यह जगह दुनिया के छोटे से छोटे टाउन में गिना जाता हे. यह जगह आधुनिक चमक दमक और शोर शराबे से दूर हे.
पुराने घर और पत्थर से  बानी सड़क देख कर लगता हे की अभी तक आधुनिक साधन यहाँ नहीं पहुंचे हे. जो भी गाड़ियां दिख रही थी सब सैलानियों की ही थी। टाउन में गाडी ले जाना मना हे और ले जाने की सुविधा ही नहीं हे. छोटी छोटी घुमावदार गलियां जहाँ आप पैदल चल सकते हे।
प्रदूषण नहीं होने से सांस में ताजगी महसूस कर सकते हे.
यहाँ पर चॉकलेट्स जो की बिना मशीनों की सहायता से बनाई जाती हे। चलते चलते एक जगह लिखा हुआ पढ़ा की हस्तनिर्मित चॉकलेट। एक बार तो विश्वास ही नहीं हुआ की यह हिंदी  लिखा गया हे ?लेकिन फिर सोचा की शायद कोई चॉकलेट प्रेमी ने किसी से लिखवाया होगा कोई हिंदुस्तानी सैलानी या विदेशी सैलानी जिसने हिंदी सीखी हुयी हो











इस खिड़की के बांयी तरफ पीले रंग के पट्टी पर सबसे नीचे हिंदी में लिखा हुआ हे
हस्त निर्मित चॉकलेट 


आप इस चित्र में देखिये की कितनी सुन्दर लिखावट हे।


आगे चलने पर पता चला की यहाँ पर फलों से जैम भी बनाया जाता हे। आप चाहे तो जैम बनने की प्रक्रिया देख सकते हे और तरह तरह के जैम चखने का आनंद भी ले सकते हे. अपने प्रियजनों के लिए जैम उपहार में भी ले जा सकते हे।
इस टाउन में कुछ पार्क हे जहाँ वृक्षों की. कटाई बहुत ही आकर्षक ढंग से की हुयी हे।


विभिन्न जानवरों का अकार दे करपेड़ों को तराशा गया हे।इस कल को टपियरी कहा जाता हे और इस छोटे से टाउन में टपियरी के बड़े बड़े उद्यान हे।
 कुछ चट्टानों का आकार भी अद्भुत लगा। कुल मिला कर प्रकृति और मानव दोनों के ही प्रयासों से इस जगह की सुंदरता में चार चाँद लग  गए हे.






Sent from my iPad








 एक छोटी सी ट्रैन के द्वारा चट्टान के ऊपर जा कर आस पास का रमणीक नजारा देख सकते हे। और वहीँ पर ही जैम. एवं चॉकलेट बनते हुए देख सकते हे।

यही से कुछ ही दूरी पर इस्कॉन का मंदिर भी हे जिसे राधा देश के नाम से जाना जाता हे.
यह सेपटोंन के पास में बना हुआ हे । यहाँ पर भक्ति वेदांत विद्यालय भी हे जहाँ पर विद्यार्थियों को वैदिक धर्म की शिक्षा दीजाती हे। मुझे यह जान कर आश्चर्य हुआ की विद्यार्थी विदेशी हे।
इस मंदिर में कृष्णा की पूजा होती हे. हमने यहाँ पर शुध्ध शाकाहारी भोजन की थाली  का आनंद उठाया।





यहीं पर बेकरी उत्पाद भी खरीदे जो की बिना अंडे के बने हुए थे ?
मंदिर के सभी कार्यकर्ता हिंदुस्तानी वेशभूषा में और गले में तुलसी की माला पहने हुए थे. .
वैसे तो हमारे लिए यह एक आम बात हे लेकिन दुनिया के इस हिस्से  यूरोप में हमारी संस्कृति की तरफ इतना प्रेम और विश्वास देख कर दिल रोमांचित हो उठा.

Monday, September 14, 2015

Brugges the Venice of north west Europe


                                                          Chocolate shop in Bruges

A small town of canals and chocolates this was my first impression of this place.Being born and brought up in desert area of Marwar (rajasthan) I am always fascinated by greenery and water bodies.
Tourists from all over the world come to rajasthan to visit sand dunes in desert but I have appreciation
for lakes canals and gardens .When we reached to Bruges after driving for one and half hour from Brussels (Belgium) I had no words to describe the beauty of this place.
This whole town is full of canals with beautiful houses at the sides of these canals.Cobblestone streets
gives the feel of ancient place.One can see lots of historical buildings.
This place is famous for its chocolates,tapestry and laces.










                                                                                 



                                                  Beautifull lace work at display
This town is so much touristic that all the restaurants in market place is always crowded.Do not get surprised if you have to wait for your turn into a restaurant.
One can see buildings and houses as old as 15th century. A ride of horse driven cart makes Bruges all the more interesting.








Boat ride in canal

As this place is at the sea shore so it was an important port for the transportation of goods from eastern europe.Once  Bruges was considered as main commercial city in the world. The concept of share trading originated from this place in early 17th century.this place has been a UNESCO world heritage site since 2000.










Sunday, July 26, 2015

Evening in Paris

              तीन दिन इन पेरिस




जिज्ञासा मानव प्रकृति हे। जिज्ञासा पूर्ती के प्रयास में ही मानव मन में यात्रा का शौक पैदा हुआ

विभिन्न स्थानों की यात्रा करने से जो जानकारी मिलाती हे वह पुस्तकों से नहीं मिल सकती है। कई बार हम अपने आस पास के स्थानों को देखने का अवसर भी नहीं मिलता है लेकिन हजारों मील दूर दुनिया घूमने के अवसर मिल जाते है। ऐसा मेरे साथ पिछले पंद्रह सालों में कई बार हुआ है। बच्चों से मिलने के बहाने अमेरिका और यूरोप के बहुत देशों का भ्रमण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
   इस बार पेरिस घूमने का अवसर मिला।करीब पचास साल पहले बॉलीवुड की एक पिक्चर बनी थी नाम था एन इवनिंग इन पेरिस.इस को देखने के लिए जाने वालों में पेरिस शहर को देखने के इछुक भी थे।







पेरिस फ्रांस देश की राजधानी है और फ्रांस का सबसे अधिक आबादी वाला शहर है। पर्यटक भी यहाँ बहुत मिलेंगे।
यह शहर संस्कृति,फैशन ,स्थापत्य कला के लिए मशहूर हे।
पेरिस को फैशन की राजधानी भी कहा जाता हे। इसके कई कारन हे।
सोलहवीं शताब्दी के राजा लुई ने  दअपने महल में  दरबारियों के लिए ड्रेस कोड बनाया था। उसके अनुसार निर्धारित वर्दी पहन कर ही महल में प्रवेश की इजाजत थी।
 उस समय को पेरिस में फैशन की शुरुआत मन जाता हे। उसके बाद में तो विश्व के जाने माने फैशन डिज़ाइनर अधिकतर पेरिस से ही निकले हे।चार्ल्स फ्रेडरिक वर्थ जिसने डिज़ाइनर वस्त्रों की शुरुआत  की थी।  चैन ल,डिओर यह सभी  डिज़ाइनर्स पेरिस के ही हे. विश्व  में सबसे अधिक फैशन शोज     पेरिस  में ही होते  हे।







पेरिस की एक गली 


शहर बहुत ही प्राचीन हे। यहाँ की पेरिस यूनिवर्सिटी यूरोप की पहली यूनिवर्सिटी है। यह शहर साइन  नदी के किनारे बसा हुआ है। साइन नदी के किनारे पर खड़े होने पर यह सोचने मजबूर  हो जाते हे की इंसान ने इस धरती  को संवारने के कैसे कैसे प्रयास किये हे.
प्रकृति ने इस स्थान पर साइन नदी बना कर छोड़ दिया था। लेकिन यहाँ के निवासियों के प्रयासों द्वारा  इसी नदी के किनारे पर भव्य इमारते बनाई गयी।  नदी पर पुल बना कर उसके दोनों और सड़क बनाई गयी। सड़क के नीचे मेट्रो ट्रैन चकई व्यवस्था की गयी। यह मेट्रो ट्रैन एक से अधिक लेवल पर चलती हे। और पेरिस के यातायात का प्रमुख अंग है्‌.

 सड़क के   नीचे दिन भर में अनगिनत बार मेट्रो ट्रैन गुजरती हे
नदी के किनारे बने हुए महल के नीचे बेसमेंट में संग्रहालय बना दिया गया।  . मेट्रो ट्रैन सीधे संग्रहालय के द्वार पर पहुंचा देती हे. इस संग्रहालय में पूरे विश्व के कलाकृतियां जो की हजारों में हे देखने को मिलेगी।
नोट्रे डैम यहाँ का कैथोलिक चर्च है। यह बारहवीं शताब्दी में बनना शुरू हुआ था। यह इमारत फ्रांस गोथिक स्थापत्यकला का अद्भुत नमूना है।इसको देखने के लिए हजारों. पर्यटक प्रतिदिन आते हे। चर्च के बाहर इन पर्यटकों के लिए इतना स्थान  हे की वे वहां खड़े हो कर अपनी बारी का इन्तजार कर सकते हे।

वैसे तो देखने के लिए अनगिनत स्थान हे कि समय काम ही पडेगा। लेकिन प्रमुख दर्शनीय स्थल में यहाँ का म्यूजियम

,एफ्फेल टावर ,नोट्रे डेम एवं वर्सेलस के महल है.
                                                                           

एफिल टावर 
एफिल टावर विश्व की ऊंची इमारतों में से एक है।
यह तीन मंजिल की है और एक हजार फ़ीट से भी अधिक ऊंची है। इस इमारत को देखने पूरे विश्व से पर्यटक आते है।

पुराने शहर की हर इमारत स्थापत्य कला का नमूना पेश करती हुयी नजर आती है।


                                                               

                                                साइन नदी के किनारे पर साइकिल रिक्शा


पेरिस में या ऐसा कहें की यूरोप में बाइसिकल बहुत ही लोकप्रिय हे। पेरिस में तो  साइन नदी के किनारे पर साइकिल रिक्शा भी मिल जाएगी जिसमे बैठ कर पर्यटक नदी पर बने पुल की सैर करते हे।