Sunday, January 25, 2026

Akhaneakhsneप

पग    पेह्चोने   पगरखि     नयन    पेह्चोने    नेह

सुरत  पेह्चोने   सहिबो     ने    मोर   पेह्चॊने    मेह

बरह     कोस  सु   बोलि  पलटे  बन्फ़ल पलटे  पाका 

छत्तीस बरस     सु  पलटे जवानी लखन न पलटे लाखा   

   ज्यांरा पड़्या स्वभाव जासी जीव सूं 

नीम ना मीठा होय सींचो गुड़ घी सू


Sunday, September 28, 2025

Poha with vegetables

      Poha with  Vegetables

                                     



         Poha as a breakfast or tea time snacks is very common and loved by all.
Preparation is so simple and all the ingredients are easily available in Indian home,s pantry.
As it does not need any kind of deep or shallow frying so it is perfect for weight watchers.
Ingredient required

Poha   1 cup
medium sized potato      1(peeled and diced in small pieces)

 ground nuts       4 tabspoons

green chilli  finely chopped  1
lemon juice         1 tea spoon
Curry leaves

coriander leaves  finely chopped
mustard seeds       1 tabspoon
cumin seeds          1 teaspoon

Finely chopped cabbage.tomatoes,cauliflower,2 table spoon of each.
green peas 1/4 cup
oil     2 tab spoon

  Take poha in a strainer and wash it in running water and soak it for five minutes,Add salt and turmeric in it and mix it gently.
in a pan put oil and when it is hot add mustard seeds and cumin seeds.Stirr and add potatoes let it saute it for 4 minutes and add all vegetables including peas, and stir,Saute again for next 2 minutes till you see potatoes are tenderAdd 1/2 teaspoon salt ,Now add soaked poha and mix well ,
Add green chillies ,curry leaves and lemon juice and mix  gently so that poha does not get mashed,

Garnish with coriander and it is ready to serve,Any kind of fine sev will enhance the taste.



Thursday, May 23, 2024

Akhane. 2

 अखा ने



सांप रो कई मोटो ने कई छोटो 

हिलायो सू साग जाय ,लडायो सू पूत जाय 

क्रोध सू तपस्या जाय पाप जाय गंग सू 

बाहर जवाई फूल बराबर ,गॉव जवाई आधा 

घर जवाई गधे बराबर ,जब चाहो जब लादा

का ले री पूँछ माते पग देवणो 

जननी  जणे तौ  भागवता ना शूरा ना पङिता

मीठो बोले मोरियो ने आखे ने गटकाय 

Pag pahchone pagrakhi ne Nayan pehchone neh?


तेल बले बाती बाले ने नाम दीये रो होय 



Saturday, June 4, 2022

A WINDOW TO WORLD WAR

तो विश्व  का इतिहास हज़ारों वर्षों से अनगिनत युद्ध और संधियों से भरा हुआ हे।
 लेकिन हाल ही में यानि की बीसवीं सदी की प्रमुख घटनाओं में ये दो युद्ध बहुत ही प्रभावशाली हे। 



विश्व के इतिहास में होने वाली महत्वपूर्ण घटनाओं में हे दो विश्वा युद्ध।
इनका असर सम्पूर्ण विश्व पर हुआ।

इतिहास में  इसके बारे में  पढ़ा था लेकिन जब यूरोप जाने का अवसर मिला तो यह घटना कुछ अधिक महत्वपूर्ण  आयी 
जर्मनी,बेल्जियम,फ्रांस अदि  में घूमते समय वहांछोड़े   गए युद्ध के  निशानों ने  सोचने पर और लिखने पर  मजबूर कर   दिया 
बेल्जियम में एक टाउन हे  leuven  बहुत ही पुरानी और बड़ी यूनिवर्सिटी है यहाँ पर । यह जगह ब्रुसेल्स से कुछ मील की दूरी पर है।  यहाँ के एक इंडियन दूकान में  एक तस्वीर लगी  थी जब   करीब  से देखा तो पता  चला  की विश्व युद्धमें  भारतीय सिपाही जिन्होंने अंग्रेजी सरकार के आदेश पर युद्ध लड़ने यूरोप में आये थे उनका ग्रुप फोटो था। देखते ही मन  में ब्रिटिश सरकार के लिए फिर से क्रोध आया। 
उस स्थान पर त्तापमान गर्मी में भी एक अंक सेंटीग्रेड में  रहता हे। वहाँ ये हमारे नागरिक उस देश के लिए लड़े जिससे हम स्वयं लड़ना चाहते थे और अधिकांश ने  अपने प्राणो की बाज़ी  लगा दी। क्यों ?


विश्व का इतिहास दो भाग में बंट गया। विश्व युद्ध के पहले और बाद में.
प्रथम विश्व युद्ध जुलाई १९१४ से नवंबर 1918
तक चला। इसका आरम्भ यूरोप से हुआ थाऑस्ट्रिया से प्रथम विश्व युद्ध का आरम्भ हुआ था..ऑस्ट्रिआ के राजा फर्डीनांड की हत्या  कारण था. इस हत्या के पीछे सर्बिआ के नागरिक का हाथ         बताया गया 
 चार वर्ष तक चले युद्ध में अनगिनत लोग मारे गए. .                                                  बताया गया. 
दो गुट  बने। ऑस्ट्रिया के साथ हंगरी जर्मनी 
सर्बिया के  साथ रशिया ,ब्रिटैन,बेल्जियम 
अमेरिका  और इटली इससे दूर रहे 
वर्सेल्स की संधि के बाद इसका अंत हुआ। राष्ट्र संघ का गठन हुआ। लेकिन २१ वर्ष बाद फिर से ऐसे हालात बने की दूसरा विश्व युद्ध आरम्भ हुआ।
विश्व युद्ध की अधिकतर लड़ाइयां यूरोप में ही लड़ी  गयी थी। जर्मनी ,ऑस्ट्रिया हंगरी और इटली एक तरफ और फ़्रांस एवं रूस और
प्रथम विश्व युद्ध के मुख्य परिणाम
१ सोवियत यूनियन की नीव रखी गयी।
२ राष्ट्र संघ की स्थापना हुयी
3 हिट्लर का ताकतवर बनना और 
नाज़ी सेना द्वारा किये गए अत्याचार जिन्होंने मानवता  की सब हदए पार     कर दी .

कुछ  विवाद जिनका हल नहीं हो सका उनके कारण द्वितीय विश्व युद्ध आरम्भ हुआ
वैसे तो विश्व युद्ध था तो सम्पूर्ण विश्व प्रभावित हुआ था लेकिन यूरोप महाद्वीप पर इसका असर अधिक हुआ था।

जर्मनी पर इनका असर सबसे अधिक हुआ था। लेकिन जर्मनी इस सबसे वापिस ताकतवर शीघ्र बन गया
आज जब कहि जब कुछलोग  मिलते हे जिन्होने दुससरा विश्व युध देखा हे और जब उनसे 
उनके अनुभव सुनने से ही सिहरन पैदा हो जाती हे। जब बर्लिन शहर को देख्नने का अवसर मिला तो हम वहां वह
जगह देखने गए जहाँ पर  दीवार जो गिरा कर पूर्व और पश्चिम जर्मनी को मिलाया गया। 
यहाँ पर ही एक तरफ वो कोठरियां अभी भी बानी हुयी हे जहाँ हिटलर की बर्बरता की कहानी लिखी हुयी हे। 
इनको कंसंट्रेशन केम्प कहा जाता हे। 
हिटलर द्वारा यहूदियों पर किये  गए जुलम इंसानी बर्बरता का  क्रूरतम उदाहरन है। 
यहां तक की स्वयं जर्मनी की जनता इसके बारे में बात करना पसंद नहीं कराती हे। 
वो लोग यह मानते हे की जो हुआ वह नहीं होना चाहिए था। 
निदर लैंड  शहर एम्स्टर्डम में एक  स्थान है  वहां हमने बहुत  कतारें लगी देखी। पूछने पर पता चला की इस इमारत के  अंदर एने फ्रेंक नाम की उस यहूदी  लड़की का वो  घर था जहाँ उसका परिवार दो साल तक हिटलर के अधिकारीयों से छिप कर रह रहा था। आखिर में एक दिन इस परिवार को  पकड़ करले   गए और पूरे परिवार की मृत्यु हिटलर द्वारा बनाये गए उन कंसंट्रेशन कैम्प में  हो गयी।  परिवार का मुखिया यानि की उसका पिता  किसी तरह बच  गया। युद्ध समाप्ति के बाद वह उस घर में  वापिस गया जहा उसे अपनी बेटी द्वारा  लिखे गए उसके दो वर्षों के संस्मरण  वाली डायरी  मिली. .जिसे उसने  छपवाया। 
उसे पढ़ने पर आश्चर्य  होती हे की १३ वर्ष की उम्र में कोई इतने  अच्छा घटनाओ का विवरण कैसे लिख सकता हे। 
उस किताब से वह इतनी प्रसिद्दहो  गयी की  उस घर को  देखने के लिए सभी पर्यटक उत्सुक हे। 
इसका   कई भाषाओ में अनुवाद किया गया। मेरे पास में उसका हिंदी अनुवाद भी है। 

जापान और सोवियत रूस से भी बेहतर जर्मनी ने युद्ध के परिणामों से उबर  कर प्रगति शील देश बना


यूरोप के जिन शहरों में बमबारी से इमारते ध्वस्त हुयी वहां नया निर्माण हुआ। वहां इन इमारतों की स्थापत्य कला 
में फरक देखने में आता हे।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद
7 दिसंबर  जापान ने अमेरिका के पर्ल हारबर    पर आक्रमण किया
८ दिसंबर को अमेरिका भी युद्ध में शामिल हो गया। अगस्त ६ को अमेरिका ने जापान पर परमाणु बम  से हमला किया।
जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहर तबाह हो गए
दूसरे विश्व युद्ध का अंत जापान द्वारा समर्पण करने  से हुआ।

दूसरे विश्व युद्ध के परिणाम 
     १   संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना
   
      २अमेरिका और रूस का सुपर पावर के रूप में अवतरण
      ३   भारी बमबारी से एशिया और यूरोप में  कई शहर क्षतिग्रस्त

   

   
      

Friday, June 3, 2022

                      आस्था या विश्वास 

मानव बहुत ही मजबूत ह्रदय एवं मजबूत इरादों वाला प्राणी हे। इस मजबूती के बूते पर ही विश्व में इतनी प्रगति हुयी हे 

विज्ञान से सम्बंधित अविष्कार एवं सुविधाएं इसी मजबूती का परिणाम हे। फिर भी इंसान की जिंदगी में कुछ पल ऐसे आते हे तब उसे लगता हे कि वह बहुत ही कमजोर है. उसकी जिंदगी की सब घटनाओं में किसी देवी शक्ति का हाथ हे। और फिर उसे अपनी आस्था की और विश्वास होता हे। इसी आस्था से कितने ही रिवाज़ और टोड़ाको   ने जनम लिया हे। सम्पूर्ण विश्व में ये  प्रचलित  हे। कोई भी परिस्थिती बदलने में वक्त लगता हे। तब तक वक्त कॉटन बहुत ही मुश्किल हो जाता हे। इन टोड्को के सहारे वक्त गुजारना आसान हो जाता हे। 

हमारे देश में हर धार्मिक स्थान पर कुछ परम्परा हे जिससे व्यक्ति अपने मनोकामना की पूर्ती के लिए निभाते हे। 

१ नदी पार करते समय उसमे एक सिक्का फेकना जिससे आपकी यात्रा सुरक्षित हो। 

२ पीपल या बड़  के पेड़ पर धागा बांधना। 

३ तिरुपति बालाजी के मंदिर में जाने पर  वहां महिला दर्शनार्थी भी अपना मुंडन करावा लेती हे। 

४ उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में अक्षय तृतीया के दिन छिपकली का दिख जाना शुभ माना  जाता है। 

  बहुत ही विचित्र है ना? 

कैलाश पर्वत मानसरोवर की यात्रा पर जाने पर वहां रंग बिरंगी झंडियां जाती हे अपनी इच्छा पूर्ती करवाने के लिए। 


ऊज्जैन  के    महाकालेश्वर      मन्दिर       मे       त्रिशुल                     रखा        जाता    हे  मनोकामना     कि    पुर्ति        के    लिये


यह तो हमारे देश की बात हुयी 

विदेश में भी इस तरह की प्रथाएं हे 

रोम  में एक बहुत ही प्रसिद्द  फाउंटेन हे जिसका नाम ट्रेवी फाउंटेन हे। 

स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना

सम्पूर्ण विश्व से हज़ारों पर्यटक आते हे। बहुत ही सूंदर नज़ारा होता हे। 

यह स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना हे। हर दर्शक को लगता हे की काश वह यहाँ दोबारा आवे। 

ऐसी मान्यता  हे की यदि फाउंटेन की तरफ पीठ करके एक सिक्का दाहिने 

हाथ में लेकर बाएं कंधे के पीछे से इसमें फेंका जाये तो दुबारा आने का संयोग बनता  हे। 

इस वजह से फाउंटेन के पानी में बहुत सिक्के इकठे हो जाते हे जो प्रशासन को  समय समय पर वहां  से निकालने  पड़ते हे। 

२ इसी तरह पेरिस में साइन नदी के ऊपर जो पुलिया बानी हुयी हे उस पर लोहे की रेलिंग हे। 

वह रेलिंग छोटे छोटे तालों से भरी हुयी हे। 

कहा जाता हे की प्रेमी युगल वहां   पर एक ताला लगा कर चाबी नदी में फेक देते हे जिससे वो कभी जुदा  नहीं होंगे। 

जर्मनी के हैम्बर्ग शहर में भी कई पुलिया की रेलिंग पर पर ताले लगे हुए हे। यूरोप में और भी बहुत जगह पर मेने यह देखे हे। 

अब तालों के  वज़न से रेलिंग झुकने लगी है। अब प्रशासन या तो रेलिंग को इन तालों सहित मजबूत बनाएगी या फिर नयी रेलिंगं और लगवायेगा। 

३ जेरूसेलम में कागज़ पर लिख कर अपने मन की मुराद पत्थर के नीचे दबी दी जाती हे। यानि की प्रार्थना की अर्जी लिख कर दी जाती हे। ऐसी  मान्यता हे कि लिख कर दी  हुयी प्रार्थना पर अवश्य निर्णय लिया जाता है। 



4 तेल अवीव में एक जगह पर सभी ज़ोडियक चिन्ह एक जगह समुद्र के किनारे  बने  हुए है। अपनी स्वयं की ज़ोडियाक चिन्ह पर हाथ रख कर समुद्र की और देखते हुए मन में अपनी मुराद  मांगी तो अवश्य पूरी होती हे ऐसी मान्यता हे। 

कैलाश पर्वत 



Monday, June 7, 2021

 बिना अंडे की केक 


                           



वैसे तो बेकिंग में अंडे का प्रयोग बहुतायत से होता हे लेकिन जो लोग अंडा नहीं पसंद करते हे  हे उनके लिए बिना अंडे के भी बेकिंग की जा सकती हे। अंडे का रिप्लेसमेंट बहुत तरहतरह से किया जा सकता हे। जैसे की अधिक मात्रा में माखन ,बेकिंग पाउडर, दही ,केला इत्यादि. .    

बनाते हे बिना अंडे की केक 

सामग्री 

दो कप मैदा 

१ १/४  कप पीसी हुयी चीनी 

३/४ कप दही 

१/३ कप माखन 

१ १/४   Tsp बेकिंग पाउडर 


3/4 कप दूध 

१/४ कप मलाई 

 २ टेबल स्पून मिल्क पाउडर 

२ टिया स्पून वनीला एसेंस 

३ टेबल स्पून टूटी फ्रूटी 

३ टेबल स्पून काजू और बादाम के टुकड़े 

ओवन को १८० डिग्री सेल्सियस पर १० मिनट के लिए प्रे हीट करने के लिए रख दे। 

एक बर्तन में मैदा और बेकिंग पाउडर मिला कर छान ले। अब इसमें मिल्क पाउडर अच्छे से मिला दे। 

दूसरे बर्तन में माखन और चीनी मिला कर अच्छे से फेट ले। अब इसमें मलाई और दही मिला दे। १/२ कप दूध मिला दे और अच्छे से मिक्स कर ले। 

अब मैदा मिलाये और एक ही दिशा में घूमते हुए मिक्स करे। अगर जरूरत हो तो बचा हुआ दूध मिला दे। यह मिश्रण 

चम्मच से डालने पर धीरे धीरे बर्तन में गिर जाये जैसा होना चाहिए इसे पौरिंग कंसिस्टेंसी कहते हे। 

आखिर में इसमें वनीला एसेंस,टूटी फ्रूटी और कहु बादाम के टुकड़े दाल कर हलके हाथ से मिक्स करे। 

एक केक तीन को बटर से चिकना करे और इसमें चुटकी भर सूख मैदा छिड़क दे। 

मिश्रण को इसमें दाल कर बेक  होने के लिए र४० मिट के लिए रख दे। ४० मिनट बाद ट्रे के बीच में एक चाकू दाल कर चेक करे। यदि चाकू एकदम सूखा निकलता हे तो कक तैयार हे। यदि चाकू साफ़ नहीं हे तो ५ मिनट और बेक कर ले। 

Tips 

ओवन को प्रे हीट अवश्य करे 

मैदा को मिश्रण में मिलएते समय बहुत अधिक न हिलाये। 

सभी  सामग्री कमरे के तापमान पर होनी चाहिए। इसके लिए मिल्क,दही,माखन इत्यादि रेफ्रिजरेटर से पहले से निकल कर रख ले। 




Monday, May 24, 2021

Nankhatai

                                                                                                                             नानखताई                                             

                                               


बहुत ही सरल तरीके से बनाये हुए बिस्किट हे ये इन्हें नानखटाई के नाम से जाना जाता है । गुजरात के सूरत शहर की नानखताई बहुत ही प्रसिद्ध हे. 

कहा जाता हे कि सत्रहवीं शताब्दी में किसी डच दम्पति ने सूरत में  इसकी शुरुआत की थी। 
लेकिन वो इसे अण्डे के साथ  बनाते थे इसलिए गुजरात की जनता इसे पसंद  नही करती थी। 
जब डच वहा से गए तो अपनी  बेकरी  एक पारसी व्यक्ति को दे कर गए थे। उसने इस  में से अण्डा हटा कर बनाना आरम्भ किया और  फिर तो यह नानखताई पूरे भारत में लोकप्रिय हो गयी। 
यह बिस्किट मुँह में रखते ही घुल जाते हे इतने नरम और स्वादिष्ट बनते  हे 
सब सामग्री हमारी रसोई में हर समय उपलब्ध रहती हे। 

इसे बनाने के लिए निम्न सामग्री की आवश्यकता होगी 
मैदा 
शक्कर 
घी 
इलायची पाउडर 
                              
बेकिंग पाउडर १ चम्मच 
पिस्ता या बादाम की कतरन 
             विधि
एक बर्तन में  घी और चीनी  को मिला कर एक व्हिस्कर से फेटिये। उसके बाद में इसमें मैदा और इलायची 
     पाउडर और बेकिंग  पाउडर मिला  दीजिये। 
जब सभी सामग्री अच्छे से मिळाली जाये  अपनी  पसंद के  पड़े  लीजिये। 

फिर ओवन में १७० डिग्री सेंटीग्रेड पर १५ मिनट  लिए बेक  कर लीजिये। 
अब ठंडा होने पर ट्रे में से निकालिये। गरम को निकालेंगे तो  टूटने की संभावना  रहती है। 



Monday, July 27, 2020

pardesh me basa desh

                                                    
                                                                       bay area

    अमेरिका  के  पश्चिम  में  प्रशांत  महासागर  के  तट पर संफ्रंसिस्को शहर बसा हुआ हे 







|शहर बहुत ही सुन्दर हे इमारतों का
स्थापत्य  निहायत ख़ूबसूरत हे   अनगिनत |दर्शनीय स्थल हे यहाँ पर |विश्व  प्रसिद्द golden gate यहीं पर हे |इस शहर के पास ही हे
सिलिकॉन वेल्ली   जिसे बे   एरिया के नाम से भी जाना जाता हे |
यहाँ के San Jose  शहर में computer में काम करने वाले  संस्थान सबसे ज्यादा हे |
कंप्यूटर के हार्डवेअर एव सोफ्ट्वेअर के उत्पादन में लगी हुई कंपनियां  यहीं पर स्थित हे |
जैसे की गूगल याहू इंटेल ओरेकल ,हेवलेट पेकार्ड  आदि |इन संस्थानों में  वेसे तो पूरी दुनिया के लोग मिलेंगे लेकिन अधिकतर भारतीय  इंजिनियर हे |चीन के लोग भी यहाँ पर बहुतायत में हे ||पिछले २० वर्षों में

भारतीयों की आबादी यहाँ पर बहुत अधिक हो गयी हे।अब  तो     एयर  ईन्दिया  की सीधीविमान सेवा      आरम्भ   हो  गयी    हे

अभी हाल ही में यहाँ के एक प्राइमरी स्कूल का बच्चों का फंक्शन देखा तो वहां पर ८५%से अधिक बच्चे भारतीय हे। प्रोग्राम में बॉलीवुड गानों पर बच्चे नाच रहे थे। स्कूल की प्रिंसिपल एक अमेरिकन महिला ने साड़ी पहन रखी थी।कुछ समय बाद अचानक भ्रम होता हे कि हम भारत में ही हे या अमेरिका में।
पिछले  बीस  सलो   मे   यहा    पर     भारतीय        वस्तुए  बहुतयत   मे   मिलने   लग    गयी हे.


|यह स्थान बहुत ही कॉस्मोपोलिटन हे |पूरी दुनिया के नागरिक यहाँ रहते हे

अमेरिका  देश की यह विशेसता हे की यहाँ सारे विश्व के लोग रहते हे |और योग्य व्यक्ति को सम्मानित किया जाता हे चाहे वह किसी भी जाति,धर्मं या देश का हो|  साथ ही गैर कानूनी काम करने वालों को दण्डित भी किया जाता है। दण्ड भी विभिन्न तरह के है। अपराध के प्रकार पर तय किया जाता है।
यदि आपने अपनी सवारी गलत स्थान पर पार्क की हे या टेढ़ी मेढ़ी पार्क की तो भी यह गैर कानूनी गिना जायेगा।
इसका जुरमाना आपको भारी रकम या पैसों से भरना होगा।
यदि यह तय समय पर नहीं भरा गया तो पेनल्टी लग कर एक बड़ी रकम बन जाती हे।
और यह कानून सिर्फ लिखे हुए नही हे इन पर ईमानदारी से अमल भी किया जाता हे।
   
      इस सिलिकॉन वेल्ली  में मंदिर मस्जिद और गुरुद्वारा सभी स्थित हे |यहाँ पर चाइना टाउन   और जापान टाउन  भी  हे. जहाँ चीन और जापान के सभी सामान मिलते हे वहां के लोग अपने धर्म की  पूजा  कर सकते हे|


विख्यात यूनिवर्सिटी यहाँ  है जैसे की बर्कले ,स्टेनफोर्ड  आदि।

यहाँ की जमीन बहुत ही उपजाऊ है। विभिन्न प्रकार की सब्ज़ियाँ  औरफल यहाँ पर पैदाहोते है।
संतरे ,स्ट्रॉबेरी ,चेरी,सेव आदि। सूखे मेवे जैसे की बादाम ,पिस्ते ,अंजीर आदि भी।

गोल्डन गेट का नाम  उस आर्मी के कप्तान जॉन सी फ्रेमोंट द्वारा रखा गया था। इसके बारे में बहुत किंवदंतियां हे
जब इस ब्रिज का निर्माण हो रहा था तब    फ्रीमांट    को लगा की यह ब्रिज ओरिएण्टल वर्ल्ड से व्यापार करने का गोल्डन अवसर प्रदान करेगा।















Tuesday, July 21, 2020

banana almonds smoothie

During summer time we try to skip dinner .That does not mean that no food.intake.Instead of having heavy and spicy one prefers something  healthy and  smoothing .So here is a healthy smoothie with banana and almonds,


Ingredients required

For serving four people

3 glasses of milk

1/2 cup fresh yogurt

2 bananas (cut into 1/2" pieces)

1/4 cups almonds

8 strawberries  (optional)

Pour  all the ingredients in mixer jar and blend it for 5 minutes.

Smoothie is ready to serve.

Recipe courtesy     From my son in law.







Monday, July 6, 2020

pav


पाव 



पाव  भाजी या वड़ा पाव पूरे देश का स्ट्रीट फ़ूड हे। चलिए आज घर में पाव  बनाते हे। 
बहुत ही आसान हे पाव  बेक करना। सबसे जरूरी बात हे ध्यान रखने की वह हे सामग्री का अनुपात यानी रेशिओ 
आवश्यक सामग्री 

मैदा २ कप 
मिल्क १ कप 
मिल्क पाउडर २ टीस्पून 
नमक १ टीस्पून 
यीस्ट २ टीस्पून 
शक्कर १टीस्पून 
मखन या घी २ टीस्पून 

एक प्याले में ३/४ कप दूध को गुनगुना करके उसमे यीस्ट और शक्कर घोल कर दस मिनट के लिए ढक  दे। 

    एक बड़े बर्तन में मैदा लेकर उसमे नमक और मिल्क पाउडर मिलादे। दस मिनट बाद जब यीस्ट के बर्तन में झाग उठाने लगे  तब इस दूध से मैदा गूंध ले   यह बहुत ही  गीला होगा। 

                                     
                                                                                     
                                                                   मेदा यीस्ट में गूंदने पर 
                                                                                        

                                                             मिश्रण फूल  कर दोगुना हो गया 
इसेढक  कर ४० मिनट के लिए रख दे। ४० मिनट बाद यह मिश्रण फूल जायेगा। 
दो या तीन चम्चम मैदा की सहायता    से  मिश्रण को हाथों से दबा दबा कर करीब दस मिनट तक गूंदे।  बाद मे मिश्रन्र को १३ भागो मे पेड़े बना ले। 
एक ट्रे को अच्छे से ग्रीस करके यानि की ब्रश से तेल लगा कर उसमे यह पेड़े रख दें। एक गीले कपडे से ढक कर j


pede


    

            पड़े ४५ मिनट बाद 
फूल कर दोगुने हो 
गए 



इसे ४५ मिनट तक रख दे। यह पेड़े फरमेंट हो कर फूल जायेंगे। अपने ओवन को १० मिनट तक प्री हीट करें। 
अब इस ट्रे को ओवन में १८० सेल्सियस तक 25 मिनट तक बेक करें। 
25 मिनट बाद ओवन बंद कर दें। अब इसे बाहर निकाल कर २० मिनट तक ठण्डा होने पर पाव बाहर  निकालें। पाव तैयार है। इसे आप भाजी के साथ पाव भाजी के रूप में परोस सकते है। 
वड़ा एवम चटनी के साथ वड़ा पाव की तरह भी परोस सकते है।  



Sunday, April 19, 2020

Pulao mangodi (badiyon) ka

In simple language pulao is a dish made of rice and spices with different “ingredients “which does the nomenclature of pulao like veg pulao,GATTA  pulao, mangodi pulao, chana dal pulao and so on .The list is endless.

During summer pulao friendly vegetables like cabbage,flower,peas,carrots etc are not available .
Then we use gatte,mangodi  or chana dal.
Here I am giving the recipe of mangodi pulao




All ingredients are easily available in you pantry .


One cup rice
1/4 cup mangodi of moong dal
5 tablespoon oil
1 table spoon salt
1 teaspoon jeera or cumin seeds
1 teaspoon red chilli powder
1/2 teaspoon turmeric powder
A pinch of hing
1 teaspoon garam masala
1 green chilli finely chopped
1 tabspoon finely chopped green coriander,and mint leaves .
1 teaspoon grated ginger




Wash and soak rice in water .Crush mangodi in the size of  smaller version of green peas .
In a cooker add oil and when it is hot enough then turn of the heat add hing and mangodis

Stir well and add chilli powder,turmeric jeera and salt keep on stirring and when mangodis turn golden brown then add soaked rice .Add three cups of water and stir and put the lid and wait for two whistles.Turn off the flame .After 10 minutes open the cooker and add Garam masala,coriander and ginger,green chillies.and mint .Stir well . Yes 
Mango do pulao is ready to serve .


Friday, January 31, 2020

veg pulao

                             
                                                                       Veg pulao


Staple food of Indians is either wheat or rice depending upon the which part of country they are .Mostly  in north india wheat is preferred and in southern part rice is main food .But when there is some special occasion then the food consists of roti ,puri and rice in the form of pulao is served throughout
country.here is one recipe for veg pulao

                                       



                                                                       

                                                                      Ingredients
                                   


1 cup basmati rice
cauli flower,potato,carrots.green beans(all diced and 1/4 cup each)
peas 1/4 cup
finely chopped ginger and green chillies each 2 table spoon


                                   Whole spices

Green cardamom  2
Cloves          4
Cinnamon    1 piece 2 inches
Black pepper  4
Cashews        10
Raisins           15
For marination


Red chilli powder   1/2 spoon
Turmeric powder    1/4 spoon
Garam masala powder  1/4 spoon
Chopped ginger and green chillies
Cardamom powder     1/2 spoon
Cinnamon               1 inch stick
1/2 spoon cumin seeds
salt according to taste

 

1/4 cup yogurt

For this pulao rice and vegetables will be cooked separately.


Soak rice in water for 20 minutes. in a bowl marinate the veggisexcept peas  with all  powdered spices and yogurt.Mix well and keep aside for ten minutes.Now in a thick bottomed pan heat 3 tabspoon oil and fry the cashews and keep aside in plate   and add cloves and cummin seeds ,and black pepper.add a pinch of asoeftieda and  pour all marinated vegetables in it.Stirr it and add peas and raisins .Let it cook for 2 miutes and turn off the gas.Vegetables are half cooked.Remaining cooking will be done with rice.

In a pan heat   4 cups water and when it starts boiling then add 2 whole cardamom and green chilli pieces and salt   now add rice stir two three times and when the grain can be broken in two pieces then turn off the gas and.drain water as rice is 75% cooked now.
Remaining cooking will be done with veggies.
In the pan which is having half cooked veggies arrang half cooked rice evenly .
Pour three table spoon of desi ghee and sprinkle finely chopped green coriander and fresh mint.
Sprinkle  three table spoon of milk to provid extra moisture for rice to get cooked .

Now cover it with a tight lid so as to hold the  steam .
On a very slow burner keep a heavy iron tawa (not non stick) and on that tawa put the pan for next eight minutes .The remaining cooking of rice and vegetables will be done here.After eight minutes remove the pan from tawa. Remove the lid and on the top layer garnish with fried cashewsPulao is ready to serve.
This can be best served with cucumber raita recipe for the same is there in this blog under the heading raita.
Tips:-  

 1  While serving use a very thin flat laddle and take out pulao gently so as that the layers of whit rice and spiced veggies visible separately to give a contrast color on plate.

 2   To make it more flavorfull sprinkle few drops of saffron soaked in milk( for ten minutes)
after cooking is done .


Monday, August 12, 2019

rawa dhokala


Sooji ( Rawa) Dhokala



                                                                  Rawaor S00ji  Dhokla


      
Dhokla is very popular dish initially from Gujarat .Dhokla is a steamed dish and very popular being fat free preparation.In this blog dhok;a recipe  made of besan has been already  mentioned.
This one is made out of wheat rawa or sooji.Besan which is chana dal flour does not suits many people or when we need some change in taste then this is the best and quick option.

Ingredients required are very simple and easily available in our pantry

Sooji or rawa      one and half cup
Curd                    1/4 cup
Salt as per taste
Eno 1/2 teaspoon

In a bowl take sooji,curd,salt and mix.Add water to make pouring consistency.
Let it soak for 15 minutes.Till then in a steamer add three cups of water and let it heat with high flame.now add eno in the mixture and mix it in the batter.In a greased plate pour the batter and put it in the steamer.Cover it .Let it cook for 10 minutes and then turn off the flame .
after 10 minutes take out the plate and let it cool again for next 10 minutes.
now cut the dhokala in desired shape .






For seasoning  

2 table spoon oil
1 table spoon mustard seeds
1 tablespoon sesame seeds
2 green chillies slit and cut
8 curry leaves
after cutting dhokalas prepare tadaka .In a pan add 2 table spoons of oil and heat it .when oil is hot then add mustard seeds,sesame seeds,chilli pieces,curry leaves.When these starts spluttering then
turn off the flame.Soread this tadaka oil evenly on dhokala plate.
Dhokala is ready to serve With any chutteney.






Monday, January 28, 2019

Home made snacks. (Farsan)

                                                                   Home    made snacks
  One can buy variety of snacks readily available from market.But sometimes when we have enough time then we can prepare some at home .These will be fresh and according to our own taste.
Let us try this mixture.

                                     





     
                                                                             








                                                                     Ingredients          

                                                                Ready to serve                                          

50 gms.     Potato.     Sev  (readily available in grocery store)
50 gms.      Makai.    Chivda  (readily available in grocery store)
50.   gms     Ground nuts

Oil.      For.     Frying


 Spices             Salt,red chilli powder,chat masala.     According to taste



In a karahi put oil and heat it .Check by putting a piece of chivada if the oil is hot enough.
If it gets fried immediately that means it is time to fry .
First fry chivada then fry potato sev .
In the end fry ground nuts properly till these starts crackling to make them crunchy.
Now mix all and then sprinkle spices and shuffle gently this mixture.
Your fresh snacks are ready to serve.Can be served with tea.
As the colour of this mixture will be in nice contrast so it is so appealing also.


Monday, October 22, 2018

Sweet rice(Binach. Marwari name)

                                                             Sweet Rice

                                                     



Rice is staple food in most of the states in India.Day to day meal rice is eaten in its simplest form i,e.
Rice cooked in water. By using this white grain and adding different spices or seasoning numerous dishes can be prepared viz. spicy or sweet.In southern part of India Tamarind rice,Lemon rice,
Curd rice and so on. In northern part spicy rice dishes are commonly known as Pulao or Tehari in marwar area.A rich rice preparation is also called as Rajasthani Kabuli. Recipe for this can be find in this blog.In this post I am telling about rice as a desert.Party is never complete without desert and these modern times in most of the parties readymade desert is being served to save time and energy of the organisers.


This is very simple and all the ingredients are available easily in our pantry.


Ingredients required
Basmati rice        1 cup
Sugar.                   1/8.  cup
Ghee.                     4 tablespoon
Cardamom powder.   1 teaspoon
Saffron.  Soaked in water or milk.    Few strands

Cloves.                     8
Cashews.                  8
Raisins.                     8
Almonds.    (Slivered).  8
     
Wash rice in water.    

In a pressure cooker add one cup water and add rice .Put lid and after one whistle remove cooker from stove.Let it cool and open the cooker.
In a thick bottom or non stick pan pour ghee and put on burner.When ghee is hot enough to give aroma then add cloves and cashews ,almonds now add rice and stir gently then add sugar ,saffron and cardamom powder .Stir gently till all the seasoning get mixed with rice now add raisins.
Sweet rice is ready to serve.
Enjoy this desert with your family.


Saturday, June 16, 2018

A trip to Orissa

हमरा देश तीन तरफ़  से समुद्र से घिरा हुआ हे। समुद्र के किनारे रहने वाले निवासियों के जीवन के अनुभव भिन्न तरह के होते हे. जो लोग समुद्र से दूर रहते हे उनकी कल्पना में समुद्र के बारे में तरह तरह के दृश्य उभरते>है।क्योंकि मेरा जन्म और बचपन मे थार के रेगिस्तान के शहर जोधपुर में हुआ जहां पर इंदिरा नहर के आने के पहले पानी की बहुत कमी थी अतः में सदा से ही बाग़ बगीचों ,झील,तालाबों में ही आनंद अनुभव कराती हूँ. उड़ीसा पहुँचते ही मन प्रसन्न हो गया। उपजाऊ भूमि,एवं जल के संसाधनों की बहुतायत से हर तरफ हरा भरा नजर .>हमारा पहला पड़ाव उड़ीसा में भुवनेश्वर था
यह उड़ीसा की राजधानी है। हवाई अड्डे पर उतरते ही लगा कि यह शहर बहुत ही आधुनिक संसाधनों से परिपूर्ण होगा। शहर साफ सुथरा शहर। निवासी मृदुभाषी एवं सरल स्वाभाव के हे.. भुवनेश्वर में हमने यहाँ के म्यूजियम को देखने का प्लान बनाया था। उसके बाद में धौली का रात्रि का ध्वनि एवं प्रकाश का शो. देखना था

                                                                                                          धौळी  का  स्मारक 

                                                             
 धौली यहाँ की दया नदी के पास बना हुआ बुद्ध धर्म का स्मारक है  दया नदी का ऐतिहासिक मह्त्व है । इसी नदी के पास सम्राट अशोक ने कलिंग का युद्ध लड़ा था परिणाम वश यह नदी रक्त रंजित हो गयी थी।  एवं उसके बाद सम्राटअशोक  ने बौद्ध धर्म अपना लिया था
यही युद्ध कलिंगा के युद्ध के नाम से जाना जाता हे। यह युद्ध बहुत ही भयंकर था।कहा जाता हे की इस युद्ध के कारन दया नदी  का पानी रक्त रंजीत हो गया था। रात्रि का शो बहुत ही आकर्षक था। ऐसा महसूस हुआ कि मौर्या वंश के काल में बैठे हुए सब देख रहे भुवनेश्वर के बाद हमने कोणार्क मंदिर देखने का निश्चित किया। लेकिन उसके पहले हमने भुवनेश्वर के पास ही कुछ मंदिरो के दर्शन किये। वैसे तो इस जगह के चारोऔर अनगिनत मंदिर हे। सभी अपने आप में भव्य एवं ऐतिहासिक;हे। सभी को देखना संभव नहीं था समयाभाव के कारण। अतः हम लिंगराज मंदिर एवं राजा रानी मंदिर के दर्शन किये। कोणार्क मंदिर सूर्यदेवता का मंदिर हे..य़ह भुवनेश्वर से सत्तर   किलोमीटर दूर हे .
                                                                        कोणार्क 
               

                                                                 कोनार्क का सूर्य मन्दिर

बहुत विस्त्रत   मैदान मे फ़ैला हुआ हे .इस मंदिर को राजा नरसिंह देव  ने १३ वी शताब्दी में बनवाया था। इसका निर्माण कलिंग स्थापत्य कला के अनुसार किया गया है। यह मंदिर सूर्य देवता को समर्पित हे। प्रभात की पहली किरण इस मंदिर में पहुंचती है। सूर्य के सात घोड़े एवं रथ के २४ पहिये इस मंदिर की स्थापत्य  कला में देखे जा सकते हे। यह स्थान अब विश्व की यूनेस्को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में दर्ज़ हे। 
कोणार्क के बाद हमने  पूरी के लिए अपनी यात्रा आरम्भ की। रास्ते  में हम कुछ समय के लिए चंद्रभागा बीच पर रुके। यह सम्पूर्ण यात्रा हमारी ओडिशा के समुद्री तट के सहारे चल रही थी। 
पूरी पहुँचाने पर शाम हो  गयी  थी । अतः पहला आकर्षण समुद्र तट पर सूर्यास्त का नज़ारा देखना  था। 

इसके बाद में हमने भगवान् जगन्नाथ के दर्शन करने गये। यह जगह हिन्दुओं के चार धाम में से एक हे ,
यहाँ पर कृष्णा बलराम एवं सुभद्रा की मूर्तियां हे ,यह मूर्तियां नीम की लकड़ी में उकेरी गयी हे ,

                                                 

जग्गनाथ मन्दिर पुरी 
वर्ष में एक बार इन मूर्तियों की रथ यात्रा निकली जाती हे। बहुत  बड़े रथ में विराजमान कर के इनको गुण्डिचा 
मंदिर में पहुँचाया जाता हे। इस यात्रा  के दर्शन करने लाखों श्रद्धालु पूरे देश से पहुंचते हे। 
                                                                    
                                                            गुण्डिचा मन्दिर का प्रवेश द्वार 


भुवनेश्वर में ही उदयगिरी एवं खण्डगिरि   की  अति प्राचीन गुफाएं है। 
यकहन का नंदन कानन राष्ट्रीय उद्यान भी देखा '

                                                             
                                                                      उद्यान  में पक्षी 



मंगल जोड़ी पक्षी अभयारण्य 

यह छिलका लेक के 



चिलका लेक 
                                
                                           यह लेक माइग्रेटरी पक्षियों के लिये बहुत ही उपर्युक्त है। 

Friday, June 15, 2018

Amsterdam

                                                                 नहरों का जाल या नेदरलैंड



 दुनिया के हर हिस्से में खूबसूरत शहर मिलते हे। सभी अपने आप में विशिष्ट। ऐतिहासिक दृष्टि से ,प्राकृतिक,मौसम,व्यापार कोई भी कारन हो सकता हे विशिष्टता का। एम्स्टर्डम शहर जो कि नेदरलैण्ड की राजधानी हे वहां जाने का अवसर मिला। जब एम्स्टर्डम शहर में भ्रमण किया तो समझ में आया की यह शहर तो सभी कारणोंसे महत्वपूर्ण हे। यूरोप का अन्य देशों के साथ व्यापार में इस शहर की मुख्य पहचान बनी हुई है। आज भी यहाँ का हवाई अड्डा बहुत ही व्यस्त एवम बड़ा हे। इस शहर का नाम यहाँ की एम्स्टर नदी पर बने डैम के किनारे बसे होने के कारण पड़ा। पूरा शहर नहरों के जाल के किनारों पर बसा हुआ हे। यहाँ पर १५० से भी अधिक नहरे हे जो की अनगिनत पुल के नीचे से निकलती हे।


                     
                                                                           टूरिस्ट बोट 


 इस शहर का भ्रमण भी हमने नाव में बैठ कर ही किया था।इन नहरों के दोनों ओर सुन्दर घ" हम ब्रुसेल्स के पास छोटे से टाउन से कार द्वारा दो घंटे में एम्स्टर्डम पहुँच गए थे। हमारा होटल एयरपोर्ट के पास में था। शहर देखने के लिए हमने एयरपोर्ट से मेट्रो ट्रैन में बैठ कर गए. हिन्दीफ़िल्मों के बहुत; दृश्य यहाँ पर फिल्माए गए थे।और आज भी यहाँ पर बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग होती है।




                                                     

  टुलिप के रंग बिरंगे फूल 

                                              अप्रेल के महीने में यहाँ पर सैलानियों की भरमार रहती हे।

यूरोप में बाइसिकल बहुत ही लोकप्रिय हे। छोटी दूरी के लिए लोग इसका प्रयोग बहुत करते हे। 
पूरे परिवार को एक साथ बाइसिकल पर घूमते हुए देखना एकदम सामान्य सी बात हे। 
इसको और आसान बनाने के लिए बाइसिकल के लिए विशेष लेन फुटपाथ  में लाल रंग की बनी होती हे जिस पर पैदल चलना वर्जित हे। 

        
एम्स्टर्डम में बाइसिकल उपलब्ध हे 



अधिकांश शहरों में किराये पर बाइसिकल उपलब्ध रहती हे। यह स्वास्थ्य की दृष्टी से भी एवं भीड़ भाड़ की जगहों
में सुविधा के तौर पर काम में ली जाती हे। 







Sunday, April 1, 2018

Wheat dalia

       Wheat Dalia is a common breakfast in northern India .RegularWheat Dalia takes time to get cooked but now a days smaller pieces of this is available in Indian stores which gets easily cooked in less than ten minutes.Best part of this dish is one can add vegetables of your choice.




                                                               



Ingredients required
 1 cup wheat Dalia
2 tabspoon oil
1/2 teaspoon mustard seeds
A pinch of hing (asoefatieda)
1/4 teaspoon of turmeric powder
1/2 teaspoon of red chilli powder
1/2 teaspoon of Garamond masala
Vegetables

                                                                 

1/2 cup finely chopped cauliflower
1/2 cup finely chopped tomatoes
1/2 cup fresh green peas
1/2 cup potatoes (diced in small pieces)
2 table spoon finely chopped green coriander,ginger,green chillies

In a thick bottom or non stick pan put oil and when it gets heated then add hing and mustard seeds .When it starts crackling then pour Dalia and start stirring till it gets roasted .After five minutes add turmeric and chilli powder stir and then add all vegetables.Stir well and add 2and half cup water .
Let it cook for next five minutes till Dalia and vegetables tender.Turn off the burner and add Garam masala ,coriander,chillies,and ginger.Stir and it is ready to serve after putting some butter or ghee over it.

Tips.     Vegetables should be chopped finely .
           
             Calorie conscious can avoid butter or ghee.

Friday, March 2, 2018

Samay aur rishte


                                               समय और रिश्ते



         जी हाँ समय और रिश्तों का गहरा रिश्ता हे। यह वाक्य शायद पहली नज़र में कुछ अटपटा सा लगेगा लेकिन यह    स च्चाई हे। इंसान इस दुनिया में कुछ रिश्तों के साथ ही प्रवेश करता हे। जो कि खून के रिश्ते यानि कि परिवार के सदस्य एवं इन सदस्यों के मित्रगण। जैसे जैसे वह बड़ा होता हे अपने आस पास खेलने वालों से दोस्ती करता हे. पाठशाला एवं  कॉलेज में मित्र एवं गुरुजनो के सम्पर्क में आता हे। इनमे कुछ के साथ विशेष मित्रता हो जाती हे. रिश्ते बन जाते हे।
इन सभी रिश्तों को निभाना जरूरी हे. यह रिश्ते खेती की तरह होते हे। रिश्ते बनाना बीज बोने की तरह हे. लेकिन यदि इन रिश्तो की देखभाल नहीं की जाए तो रिश्ते यह मुरझा सकते हे। समय और प्रयत्न रिश्तों की खाद हे।
कहते है कि बचपन में प्यार मुफ्त में मिलता है और बड़े होने पर उसे कमाना पड़ता है। कमाने से मतलब हमें
प्रयास करना पड़ता है कि रिश्तों में मिठास बनी रहे और इसका प्यार हमें मिलता रहे।

इसके लिए हमें हमारा समय देना अत्यंत आवशयक हे। इनके सुख दुःख में शामिल होना जरूरी हे।
जरूरत के समय मदद करने से रिश्तों में मजबूती आती हे।
शिक्षा समाप्त होने के बाद अपनी आजीविका के लिए कहीं जाना पड़ता हे। नयीजगह  नए लोग। नए पड़ोसी। दायरा बढ़ता हे रिश्तों का।
इसका यह अर्थ नहीं कि पुराने संबंधों को नज़रअंदाज़ कर दिया जाये। पुराने संबंधों से दूर आ जाते हे लेकिन फिर भी आज के युग में तकनिकी सहायता से दूरी पर विजय पा ली गयी हे। फ़ोन,ईमेल,एवं सोशल साइट्स के द्वारा हम संपर्क में रह सकते हे। जनम दिन ,शादी की सालगिरह आदि पर एक छोटा सा सन्देश ,या तरक्की के अवसर बधाई  का सन्देश भेज देने से रिश्ते मजबूत होते हे। और कम समय में संपर्क बना रहता हे।



ज़रा सोचिये जब हमें अपने जनम दिन पर कोई सन्देश मिलता हे तो हम अपने आप को कितना महत्वपूर्ण समझने लगते हे ,ख़ुशी होती हे।

इंटरनेट का जमाना हे। यदि किसी को सौगात भेजने का बजट हे तो उसकी भी सुविधा  हो गयी हे।
छोटा सा सन्देश ,छोटी सी सौगात ,थोड़ा सा समय और नतीजा ढेर सारे रिश्तेदार या कहे की शुभचिंतक।
जी हाँ शुभचिन्तक क्योंकि यदि आप इनकी प्रगति पर बधाई सन्देश भेजते हे तो ये भी शुभकामना करेंगे की आपके जीवन में भी ऐसे क्षण आये की ये अपनी ख़ुशी प्रकट कर सकें।
इसके अलावा यदि कोई कठिनाई में हे तो हर संभव उसकी मदद करने से भी संबंधों में प्रगाढ़ता आती हे।


आज से पचास साल पहले जिंदगी की गति इतनी तेज नहीं थी जितनी आज हे। इस धीमी गति को तेजी मिली हे फ़ोन एवं इंटरनेट से। जब २००१ में भूकंप गुजरात में आया तो उसकी सूचना भारत के दक्षिण प्रान्त के निवासियों को उनके अमेरिकाएवं विश्व के अनेक कोनो  में रहने वाले रिश्तेदारों से मिली।
और शीघ्र् ही इन प्रवासियों ने अपने लोगों को सहायता पहुँचाने के प्रयत्न आरम्भ कर दिए।
इंटरनेट की वजह से.सम्पूर्ण  विश्व करीब आ गया है। इस तेज गति की जिंदगी में हम कम  समय और कम  प्रत्यनों से रिश्तों को
मजबूत बनाने में आधुनिक तकनीक का सहारा ले सकते हे।


शारीरिक रूप में न सही लेकिन भावनात्मक तौर  हम अपने मित्रों एवं रिश्तेदारों के सुख दुःख में इन सुविधाओं के माध्यम से अपनी उपस्थिति का एहसास दिला सकते हे।


  तो अब उठाइये अपना फोन ,कलम या इंटरनेट और करिये  अपने रिश्तों में गरमाहट लाने का प्रयास बिना समय गंवाये।



Friday, February 9, 2018

romanchak rome

                                                     
                                                            रोमांच से भरपूर रोम


विद्यार्थी जीवन में जब स्कूल मेंभूगोल की कक्षा में  विश्व का ग्लोब देखते थे तो अचम्भा होता था की कैसे नक़्शे बनाने वाले सम्पूर्ण विश्व को एक स्फीयर में चित्रित कर देते है। फिर इतिहास में पढ़ते थे विभिन्न सभ्यताओं के बारे में जो की हजारों साल पहले विद्यमान थी। एशिया में हरप्पा एवं मोहनजोदड़ो की सभ्यता एवं  यूरोप में यूनानी सभ्यता। विभिन्न साम्राज्यों में रोमन साम्राज्य एवं इसकी विशालता के बारे में बहुत पढ़ाथा।  किसी भी विशालता का अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल होता हे जब तक हम उसे देख नहीं लेते।
सौभाग्य से इस वर्ष अक्टूबर में रोम शहर जो की इटली में हे घूमने का अवसर मिला।हमने ब्रुसेल्स एयरपोर्ट से जो की बेल्जियम में हे रोम की फ्लाइट ली और डेढ़ घंटे में रोम
रोमन साम्राज्य की भव्यता  का अनुमान भी रोम देखने के बाद ही हुआ। आज से हजारों वर्ष पहले जो इम्मारते बनाई गयी उनकी स्थापत्य कला देख कर बहुत ही अचम्भा होता हे। is
इस शहर की स्थापना.  ईसा पूर्व ८०० वर्ष पुरानी बताई जाती हे। कहा जाता हे की पाश्चात्य सभ्यता का जनम यहीं
पर हुआ था।
वैसे तो रोम में अनगिनत दर्शनीय जगह हे। इन सभी को देखना तीन दिन में संभव नहीं था। फिर भी जिन जगह को देखा
देखते ही रह गयी।

फोरम जो कि किसी वक्त बहुत सारी गतिविधयों का केंद्र था आज कुछ मूर्तियों एवं उस समय के इमारतों के खंडहर के रूप में आज मौजूद हे।





यह बाज़ार ,सांस्कृतिक एवं राजनितिक गतिवधियों का स्थान था।हर

                                                        रोम शहर  का फोरम     

       
                                      

यह पर ही जुलुस निकलना,खेल कूद प्रतियोगिता एवं न्यायिक प्रक्रिया होती थी। यह विश्व भर में सबसे अधिक
गतिविधि वाला केंद्र था।
रोम शहर कला एवं स्थापत्य का भण्डार सा हे. .छार सड़क या गली बहुत ही बड़े चौक में मिलती हे और वहां बड़े ऊंचे खम्भे नजर आते हे जिनके ऊपर नक्काशी  द्वारा विभिन्न भाषाओँ में कुछ लिखा हुआ होगा या फिर आकृतियों द्वारा विचार प्रकट किये हुए हे।


                                             
     फोरम में खड़ा स्तम्भ  (नक्काशी वाला खम्भा )
                                                       




                                                                










                                                        स्तम्भ पर की हुयी नक्काशी

 इन स्तम्भ की ऊंचाई को देख कर समझ में ही नै आता की कलाकार ने कैसे इतनी ऊंचाई पर अपनी कला बिखेरी होगी ?
वैटिकन म्यूजियम जो की वैटिकन सिटी के अंदर हे विश्व के उल्लेखनीय म्यूजियम में से एक हे और यहाँ आने वाले     पर्यटकों की संख्या भी अनगिनत हे।
यहाँ पर ७०,००० से भी अधिक कलाकृतियों का संग्रह हे जिसमे से २०,००० के करीब पर्यटकों के लिए रखी  गयी हे।
इनमे पोप द्वारा एकत्रित किये गए भित्ति चित्र एवं उच्च कोटि की स्थापत्य कला की मूर्तियां हे। माईकल ऐंजेलो जो की   चित्रकला एवं स्थापत्यकला दोनों में निपुण था के द्वारा बनाये गए कलाकृति का संग्रह हे.
ट्रेवी फाउंटेन जो की १८वी शताब्दी में  रोम के ट्रेवी तहसील में बनवाया गया था.पत्थऱ से तराशा गए यह फवारा देखते हे तो लगता हे की से निहारते ही रहे। रात्रि के समय तो इसमें और भी निखार आ जाता हे। यहाँ पर बहुत हॉलीवूड की फिल्मो की शूटिंग भी हो चुकी हे. मान्यता हे की यदि इसमें एक सिक्का फेका जाने पर यहाँ दुबारा आने का संयोग बनता हे. इस वजह से हर पर्यटक यहाँ सिक्का फेकते रहते हे और प्रशासन इन सिक्को को यहाँ से निकालते  हे।
           


                                                   
          

पूरे विश्व में प्रसिद्ध पिज़्ज़ा एवम पास्ता इटली की ही देन है। और इसी कारण रोम के हर गली कूचे में पिज़्ज़ा एवम पास्ता की रेस्त्रां   मिल जायेंगे। यहां पर शाकाहारी  पर्यटकों को अधिक  दिक्कत नहीं होती हे।
हर सड़क कुछ दूरी के बाद एक विशाल चौक में मिल जाती हे। इस तरह पूरे शहर में अनगिनत चौक हे
चौक के बीच में  या तो विशाल स्तम्भ या सूंदर कलाकृतियों से सुसज्जित फव्वारा है जो की जगह की खूबसूरती को निखारता है।
अनगिनत म्यूजियम भी हे यहाँ पर लेकिंन सभी को देखना कम समय में सम्भव नहीं हे।
यहाँ पर एक स्थान है जिसे स्पेनिश स्टेप्स कहते है। हर समय पर्याटकों की भीड़ लगी रहती है। बहुत ही सुन्दर
संरचना है।