Saturday, June 16, 2018

A trip to Orissa

                                                                  जगह जगन्नाथ की


हमारा देश बहुत विशाल हे। और यहाँ पर हर बीस मील पर भाषा बदलती हे और हर १०० मील पर पहनावा और खाना बदलता हे। इस विविधता के कारण यात्रा बहुत ही रोचक हो जाती हे। इस बार देश के इस पूर्वी भाग उड़ीसा में जाने का मौका मिला।
भाषा,वेशभूषा एवं भोजन सभी अलग मिले। हमारा पहला पड़ाव भुवनेश्वर था। बहुत ही सूंदर एवं साफ़ सुथरा शहर हे।
इस शहर का महत्व बहुत ऐतिहासिक हे.ईसा से २५० साल पहले अशोक (मौर्य साम्राज्य) एवं कलिंग के साथ यह युद्ध हुआ। भुवनेश्वर से 8मील की दूरी पर दया नदी हे। कहा जाता हे की जब कलिंग का युद्ध हुआ तो दया नदी में पानी की जगह रक्त ही रक्त हो गया था। इस युद्ध के बाद अशोक ने बुद्ध धर्म अपना लिया था।यह युद्ध धौलागिरी पहाड़ी पर लड़ा गया था। अशोक ने इस पहाड़ी को बुद्ध धर्म के केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रयास किया था।  यहाँ पर रात्रि में ध्वनि एवं प्रकाश का शो रात्रि में होता हे जिसमे मौर्य साम्राज्य के बारे में एवम कलिंग युद्ध के बारे में जानकारी होती हे।
भुवनेश्वर से पूरी जाते समय रास्ते में कोणार्क का सूर्यमंदिर हे।

ओड़िसा में ही पूरी में समुद्र का किनारा जहाँ सूर्योदय एवं सूर्यास्त का सूंदर दृश्य देख सकते हे।

                                                         
सूर्यास्त के समय 

कैमल की सवारी पूरी के समुद्र के किनारे 


धौळी का स्मारक 


 जग्गनाथ भगवान् का जग प्रसिद्ध भव्य मंदिर भी पूरी में ही हे।

यह हिन्दू धर्म में बहुत ही महत्व का मंदिर हे.  चार धाम में एक धाम पूरी का मन जाताहै।


                                              जग्गनाथ भगवान् का मन्दिर

चार धाम भारत के चरों दिशाओं में स्थित हे और पूर्व दिशा में यह जगन्नाथ पूरी का मंदिर हे।
इस मंदिर में कृष्ण,बलराम एवं सुभद्रा की मूर्तियां स्थापित हे

                  यहीँ पूरी में ही गुण्डेचा मंदिर भी हे जहाँ भगवान् जगन्नाथ रथ यात्रा के दिन जाते हे और कुछ दिन यहीं पर ठहरते  हे।
मंगल जोड़ी बर्ड सैंक्चुरी 

पूरी से वापसी यात्रा में हमने बर्ड सैंक्चुरी मंगल जोड़ी में वभिन्न प्रकार की चिड़ियों को देखा।

यहाँ के दर्शनीय स्थान में चिलका लेक जो की मील तक फैली  हुयी हे वहां पर फ्लेमिंगो चिड़ियाँ देखी
चिलका लेक के उत्तर में मंगल जोड़ी नाम की बर्ड सैंक्चुअरी हे जहाँ पर ३०००००  तरह की चिड़ियाँ आती हे।
यहाँ पर पक्षी प्रेमियों के लिए बहुत ही अच्छी व्यस्था हे।
प्राकृतिक वातावरण में ठहरने की सुविधा हे। अनुभवी गाइड जिन्हे इन पक्षियों के  जानकारी हे उपलब्ध हे।

शांत  चप्पू  से चलने वाली नाव  में बैठ  कर हमने इन चिड़ियों को बहुत ही करीब से देखा।

भुवनेश्वर में दो गुफाएं हे उदयगिरि और खंडगिरि जो की ऐतिहासिक महत्व की हे। इन गुफाओं का कुछ हिस्सा प्राकृतिक एवं कुछ मानव निर्मित हे। ये ईसा से दो शताब्दी पूर्व निर्मित हे।

भुवनेश्वर में ही कानन बोटैनिकल पार्क हे वहां पर भी सर्दी के मौसम में पक्षी आते हे।


उड़ीसा में एक छोटा शहर हे जिसका नाम पीपली हे यहाँ पर पैचवर्क यानि की कपडे के ऊपर विभिन्न रंगों के कपड़े टांक  कर डिज़ाइन बनाये जाते हे
बहुत ही सूंदर बैग्स चद्दर एवंटेबल कवर अदि बनाये जाते हे


एक ऐसा ही गॉव जहाँ परपेपर के ऊपर चित्रकारी की जाती हे  इस गॉव का नाम हे रघुनाथपुर

एक पेपर पर महाभारत या रामायण की पूरी कहानी चित्रों द्वारा दिखाना बहुत ही ऊंचे दर्ज़े की कलाकार का काम हे। इस गॉंव में अधिकतर कलाकार यह बनाते हे।
ओरिसा राज्य कला ,एवं प्रकृति से भरपूर हे। यहाँ पर चांदी के  ऊपर कटवर्क का बहुत ही सूंदर काम होता हे जिसे फिलीग्री कहते हे।

उड़ीसा राज्य प्राकर्तिक संसाधनों से भरपूर है। उपजाऊ जमीन एवं भरपूर पानी। जो की रेगिस्तान में रहने वालों के लिए दुर्लभ होताहे। सोचने को मज्ब्बूर हो जाते हे की फिर यहाँ के निवासियों को मूलभूत सुविधाएँ भी क्यों नहीं उपलब्ध है।
जैसे ही हम बड़े शहरों की सीमा पार  कर गॉव की तरफ पहुंचते हे तो एक उदासी एवं असहजता का एहसास होता है। वहां के निवासियों के रहन सहन और सुविधाओं की कमी का एहसास होता है।

कारन जो भी हो आशा हे की शीघ्र ही जिम्मेदार सरकारें कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाएंगी ताकि इन्हे भी वह सब
सुविधाएँ उपलब्ध हो सके।


Friday, June 15, 2018

Amsterdam

                                                    नहरों का जाल या नेदरलैंड

दुनिया के हर हिस्से में खूबसूरत शहर मिलते हे। सभी अपने आप में विशिष्ट।
ऐतिहासिक दृष्टि से ,प्राकृतिक,मौसम,व्यापार कोई भी कारन हो सकता हे विशिष्टता का।
एम्स्टर्डम शहर जो की नेदरलैण्ड की राजधानी हे वहां जाने का अवसर मिला।
जब एम्स्टर्डम शहर में भ्रमण किया तो समझ में आया की यह शहर तो सभी कारणों से महत्वपूर्ण हे।
इस शहर का नाम यहाँ की एम्स्टर नदी के पर बने डैम के किनारे बसे होने के कारण पड़ा।
पूरा शहर नहरों के जाल के किनारों पर बसा हुआ हे। यहाँ पर १५० से भी अधिक नहरे हे जो की अनगिनत पुल के नीचे से निकलती हे। इस शहर का भ्रमण भी हमने नाव में बैठ कर ही किया था।इन नहरों के दोनों ओर सुन्दर घर बने हुए है।



                                                             

                                                 नाव से शहर का दृश्य

हम ब्रुसेल्स के पास छोटे से टाउन लुवान से कार द्वारा दो घंटे में एम्स्टर्डम पहुँच गए थे। हमारा होटल एयरपोर्ट के पास में था। शहर देखने के लिए हमने एयरपोर्ट से मेट्रो ट्रैन में बैठ कर गए.  फिल्म के कुछ दृश्य यहाँ पर फिल्माए गए थे।
 अप्रेल के महीने में यहाँ पर सैलानियों की भरमार रहती हे।

यूरोप के अन्य जगहों की तरह यहाँ पर भी बाइसिकल  का बहुत प्रचलन  हे।
यहाँ पर ऐनी फ्रैंक का घर हे जहाँ दूसरे विश्व युद्ध के दौरान वह हिटलर की सेना से छिप कर रह रही थी. .और अपने अनुभव एक डायरी में लिख रहीउसकी डायरी बहुत ही लोकप्रिय हो गयी थी।
थी। यह घर अब एक दर्शनीय स्थान बन गया हे जिसके अंदर जाने के लिए  पर्यटकों की भीड़ लगी रहती हे।
वैन घोघ जो कि एक महान पेंटर था उसकी पेंटिंग्स का म्यूजियम यहाँ पर हे।

यहां क़ा केनाल सिस्टम UNESCO की विश्व धरोहर में लिस्टेड
यहाँ पर टुलिप के फूल बहुत होते हैं। इन फूलों की विशेषता यह है कि यह अनेक रंगों के होते हे और बहुत ही सूंदर होते हे। मई अप्रैल के महीने में इन फूलों की बहार आई हुयी होती हे और इनको देखने के लिए पर्यटक पूरी दुनिया से आते हे.
                                                           

टुलिप के फूल 

इन्ही दिनों यहाँ पर टूलिप फेस्टिवल होता हे। दूर से देखने पर लगता हे की विभिन्न रंगो की चद्दर बिछी हुई  हे।
बॉलीवुड के फिल्मों
की शूटिंग भी यहाँ इन फूलों के बीच मे होती हे।

                                               

Sunday, April 1, 2018

Wheat dalia

       Wheat Dalia is a common breakfast in northern India .RegularWheat Dalia takes time to get cooked but now a days smaller pieces of this is available in Indian stores which gets easily cooked in less than ten minutes.Best part of this dish is one can add vegetables of your choice.




                                                                 



Ingredients required
 1 cup wheat Dalia
2 tabspoon oil
1/2 teaspoon mustard seeds
A pinch of hing (asoefatieda)
1/4 teaspoon of turmeric powder
1/2 teaspoon of red chilli powder
1/2 teaspoon of Garamond masala
Vegetables



1/2 cup finely chopped cauliflower
1/2 cup finely chopped tomatoes
1/2 cup fresh green peas
1/2 cup potatoes (diced in small pieces)
2 table spoon finely chopped green coriander,ginger,green chillies

In a thick bottom or non stick pan put oil and when it gets heated then add hing and mustard seeds .When it starts crackling then pour Dalia and start stirring till it gets roasted .After five minutes add turmeric and chilli powder stir and then add all vegetables.Stir well and add 2and half cup water .
Let it cook for next five minutes till Dalia and vegetables tender.Turn off the burner and add Garam masala ,coriander,chillies,and ginger.Stir and it is ready to serve after putting some butter or ghee over it.

Tips.     Vegetables should be chopped finely .
           
             Calorie conscious can avoid butter or ghee.