Sunday, April 12, 2015

Udaipur ka kila(city palace)

वैसे तो राजस्थान का नाम सुनते ही रेगिस्तान ही दिमाग में आता हे लेकिन मेवाड़ का इलाका जहाँ पर उदयपुर बसा हुआ है एकदम अलग है
उदयपुर शहर राजा  उदयसिंह द्वरा बसाया गया था।इसके पहले मेवाड़  की राजधानी चितोड़  थी
झीलों की नगरी उदयपुर   राजस्थान के कश्मीर के नाम से भी जानी  जाती हे ।इस इलाके में तालाबो एवं पहाड़ों की भरमार हे ।उदयपुर का किला जिसे  citypalace भी कहते हैं यहाँ की  प्रसिद्द झील पिछोला  के  पूर्वी किनारे पर है ।.
किले का मुख्य द्वार जगदीश चौक के बायीं तरफ है कहा जाता है की इस किले को  बनाने में २२  राजाओं द्वारा अलग अलग समय पर योगदान दिया गया है




                                                                         

किले के अंदर 
इसके पहले मेवाड़  की राज धानी चित्तोड़  थी ।  किले के पीछे की और बहुत  घाट बने हुए हे तालाब मे जाने के लिए ।जेसे  बंसी घाट ,मोहन घाट आदि ।पहाड़ी इलाका होने के कारण  किले के प्रवेश द्वार से थोड़ी चढ़ाई  कर के किले में प्रवेश करते हे  इस किले के अधिकांश भाग को  संग्रहालय   बना दिया   गया हे जहाँ एतिहासिक चित्रों एवं कलाकृतियों को सहेज कर रखा गया हे ।भीतरी महलों में नक्काशी एवं चित्रकारी देखते ही बनती हे ।मयूर चौक में शीशे का बना हुआ मोर प्राचीन  समय की कला को दर्शाता हे ।
लक्ष्मी चौक में  बहुत सुंदर पालकियां रखी  हुई  है ।यहाँ से रानियाँ  पालकी में बैठ कर किले के बाहर प्रस्थान करती थी ।
महलों के झरोखे पिछोला झील में खुलते है और वहां से प्रकृतके  ख़ूबसूरत नज़ारे का आनंद लिया जा सकता है 

जब राजा उदयसिंह मुग़लों द्वारा युद्ध में हार गए तो अपनी  राजधानी उदयपुर शहर बसा कर यहाँ बना ली। 

यह इस सिटी पैलेस के अंदर बहुत महल बने हुए है। 





                                                                       


                                                    किले के महलों  का दृश्य पिछोला झील से


किले के पीछे की और देखने पर जग निवास और जग मंदिर की खुबसूरत इमारते जो की झील में बनायी हुयी हे दर्शक का मन मोह लेती हे। आज इनमे से एक को तो होटल बना दिया गया हे। होटल लेक पैलेस के नाम से मशहूर हे।
उदयपुर में एक और झील जिसका नाम फतेहसागर हे बहुत ही सुन्दर पर्यटन स्थल हे। झील का सामने ही मोती मगरी पर महाराणा प्रताप का स्मारक बना हुआ हे।






फतेहसागर के किनारे पर घूमने का एक अद्भुत आनंद आता हे। यह किनारा फतेहसागर की पाल के नाम से जाना जाता
हे. मेवाड़ की जलवायु गुलाब की पैदावार के लिए काफी उपर्युक्त हे। उदयपुर में एक बगीचे का नाम ही गुलाब बाग़ हे. इस बाग़ के अंदर एक जंतुआलय ,एवं एक बच्चों के लिए खिलौना गाडी भी हे। इसी बगीचे में एक पुस्तकालय भी हे जिसका नाम सरस्वती भवन पुस्तकालय हे।
इतना छोटा सा शहर लेकिन मनोरंजन से भरपूर हे। राजाओं के जमाने में रानियों के मनोरंजन के लिए अलग से उद्यान की व्यवस्था की गयी थी। इस जगह को सहेलियों की बाड़ी कहा जाता हे। यहां पर विशेष पर्वों पर केवल औरतों को ही जाने की प्रथा थी. अब भी सावन के त्योहारों पर यह स्थान स्त्रियों के लिए ही आरक्षित रहता हे।
पर्वतीय क्षेत्र होने से चारों तरफ से पहाड़ियों से गिरा हुआ शहर हे.ऐसी ही एक पहाड़ी पर सज्जन गढ़ की ईमारत हे। यह इमारत अपने आप में तो दर्शनीय हे ही लेकिन यहाँ से पूरे उदयपुर एवं मेवाड़ का दृश्य भी देखने योग्य हे.






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